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स्कूल चले हम...( नवभारत एजुकेशन स्पेशल)

नवभारत एजुकेशन स्पेशल, रायपुर
दिनांक
:- 29.06.2015

स्कूल चले हम...

किसी भी बच्चे के व्यक्तित्व के विकास पर शैक्षिक कारकों का बहुत प्रभाव पड़ता है। बच्चे के जीवन के आंरभिक सालो में उसकी दुनिया दो भागो में बंट जाती है- परिवार का संसार तथा स्कूल का संसार परिवार के सदस्यों द्वारा बच्चे के शुरूआती ढाई-तीन वर्षो में शिक्षा एव संस्कार दिए जाते है। फिर शुरू होती है, बच्चे की स्कूल शिक्षा।

अगर आपका बच्चा पहली बार स्कूल जा रहा है तो कई सारी बातो को ध्यान में रखना होगा। पहली बार स्कूल जाने वाले बच्चे से रोज ढेर सारी बाते कीजिये, उनकी हौसला अफजाई कीजिये एक बात और बता दू, बच्चे का स्कूल जाना, मतलब माता-पिता और घर के अन्य सदस्यों के बीच में दिनचर्या बदलाव जाता है। 

बच्चो के लिए यह पहला अनुभव होता है, जब वो अपने माता पिता को छोड़कर अकेले घर से बाहर निकलते है। यह उसकी जिंदगी का पहला बदलाव होता है यह उनके लिए ख़ुशी और तनाव का मिश्रण होता है, एक तरफ उन्हें यह ख़ुशी होती है कि वो अब बड़े हो गए है उनके लिए स्कूल जाना जिज्ञासा  का विषय होता है। वही बाहर के माहौल में, नये साथियो के बीच वो एडजस्ट हो जायेगे के नहीं? यह उनके लिए तनाव का विषय रहता है। बच्चा जब घर वापस आता है तो इस बात का ध्यान रखे माता कि -पिता या घर का कोई सदस्य उनके पास जरूर होना चाहिए। उसके पास बताने को बहुत कुछ होता है थोड़ा धैर्य के साथ बच्चो की जरूर सुनिए।  बच्चे को नई किताबे मिलती है उनके साथ बैठकर उनकी कॉपी-किताबो में कव्हर चढ़ाए।  बच्चे को पूरी प्रोसेस में शामिल कीजिये। रंग-बिरंगे नाम वाले स्टिकर लगाकर, बच्चों को दीजिये और उन्हें कॉपी में लगाने दीजिये अधिकतर माता-पिता की आदत होती है बच्चो को सब कुछ हाथ में कर